इकोनॉमी लाचार है फिर भी बाजार में बहार है, आखिर क्यों?

बीते दो हफ्तों में देसी और विदेशी आर्थिक एजेंसियों की भारत की विकास दर ( India’s Growth Rate ) के अनुमान में गिरावट दर्ज की है। मौजूदा वित्त वर्ष में मूडीज से लेकर आरबीआई तक जीडीपी अनुमान 5 फीसदी या उससे नीचे लेकर आ गया है। उसके बाद भी शेयर बाजार ( Share Market ) में तेजी देखने को मिल रही है। शेयर बाजार आज 41,200 अंकों के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। लगातार तीन दिनों से शेयर बाजार में तेजी देखने को मिल रही है। जानकारों की मानें तो विदेशी संकेतों दम पर शेयर बाजार में चुस्ती देखने को मिल रही है। जबकि देश इंडस्ट्रीयल ग्रोथ ( Industrial growth ) लगातार तीसरे महीने नीचे है। 18 कोर सेक्टर में 10 की ग्रोथ माइनस में जा चुकी है। ऐसे में सवाल ये है कि देश की इकोनॉमी और इंडस्ट्री की ग्रोथ काफी कम होने के बाद भी बाजार में तेजी क्यों हैं?

इकोनॉमी में लगातार गिरावट
देश की इकोनॉमी या यूं कहें भारत की विकास दर में लगातार गिरावट देखने को मिली। दूसरी तिमाही में देश की विकास दर 4.5 फीसदी पर रह गई। वहीं पूरे वित्त वर्ष की इकोनॉमी का अनुमान 5 फीसदी लगाया है। वहीं मूडीज, डीबीएस क्रिसिल, गोल्डमैन सैसे, एशियन विकास बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक ने भी जीडीपी के अनुमान में बड़ी कमी की है। मूडीज इंवेस्टर्स ने अपने अनुमान में भारत की जीडीपी 4.9 फीसदी पर लेकर आ गए हैं। डीबीएस बैकिंग समूह ने देश की जीडीपी अनुमान को 5.5 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया। एडीबी ने बीते बुधवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी का अनुमान घटाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैसे और क्रिसिल दोनों ही भारत की जीडीपी रफ्तार को पहले के 6 फीसदी की की तुलना में घटाकर 5.3 फीसदी पर रहने का अनुमान व्यक्त कर चुके हैं।

महंगाई 40 महीने के उच्चतम स्तर पर
अगर बात इकोनॉमी के साथ महंगाई के आंकड़ों की भी बात करें तो वो भी सरकार के फेवर में नहीं है। मौजूदा समय में खुदरा महंगाई दर 40 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। आंकड़ों की बात करें तो खुदरा महंगाई दर नवंबर महीने में बढ़कर 5.54 फीसदी पर आ गई है। पिछले महीने अक्टूबर में यह 4.62 फीसदी पर थी। वहीं, नवंबर 2018 में खुदरा महंगाई दर महज 2.33 फीसदी थी। थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित देश की वार्षिक महंगाई दर नवंबर में बढ़कर 0.58 फीसदी हो गई। जबकि अक्टूबर में यह 0.16 फीसदी थी। पिछले साल नवंबर में यह दर 4.47 फीसदी दर्ज की गई थी। वहीं देश के औद्योगिक उत्पादन में अक्टूबर में 3.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जो अक्टूबर 2018 में 8.4 फीसदी थी। विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन में अक्टूबर में 2.1 फीसदी की गिरावट आई है।

बाजार 41200 के पार
वहीं बात शेयर बाजार की बात करें तो इकोनॉमी के आंकड़े और शेयर बाजार के सूचकांक में गहरा संबंध होता है। इकोनॉमी के आंकड़े अच्छे होंगे तो शेयर बाजार में सेंटीमेंट्स भी बेहतर दिखाई देंगे। बीते कुछ दिनों से इसके विपरीत दिखाई दे रहा है। इकोनॉमी के आंकड़ें बेहतर ना होने के बाद भी बाजार में अच्छी रौनक देखने को मिल रही है। बीते एक महीने में यह चौथा मौका है जब बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 41 हजार के पार चला गया है। मंगलवार को बाजार अपने नए रिकॉर्ड पर 41,200 के स्तर को पार कर गया है। वहीं बैंकिंग, आईटी और ऑटो इंडस्ट्री में भी तेजी देखने को मिल रही है।चकांक में गहरा संबंध होता है। इकोनॉमी के आंकड़े अच्छे होंगे तो शेयर बाजार में सेंटीमेंट्स भी बेहतर दिखाई देंगे। बीते कुछ दिनों से इसके विपरीत दिखाई दे रहा है। इकोनॉमी के आंकड़ें बेहतर ना होने के बाद भी बाजार में अच्छी रौनक देखने को मिल रही है। बीते एक महीने में यह चौथा मौका है जब बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 41 हजार के पार चला गया है। मंगलवार को बाजार अपने नए रिकॉर्ड पर 41,200 के स्तर को पार कर गया है। वहीं बैंकिंग, आईटी और ऑटो इंडस्ट्री में भी तेजी देखने को मिल रही है।

बाजार में बढ़त की वजह
बाजार में तेजी की सबसे बड़ी विदेशी निवेशकों का निवेश और अमरीका और चीन के बीच ट्रेड वॉर का हल्का रहना है। जानकारों की मानें तो बीते कुछ समय से विदेशी निवेशकों का निवेश बढ़ा है। पूरे साल में भी बाजार में विदेशी निवेशकों का रुझान भारत में देखा गया है। दूसरा बीते कुछ महीनों में अमरीका और चीन के बीच ट्रेड वॉर की स्थिति हल्की रही है। जिसका असर अमरीका और चीन के साथ एशिया के बड़े बाजारों में देखा गया। जिसका असर भारत में भी देखने को मिला है। केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया कहना है कि हाल ही में भारत सरकार की ओर जो रिफॉर्म जैसे कॉरपोरेट टैक्स में कटौती और जो कुछ कंपनियों के अच्छे तिमाही नतीजे आए हैं उनका भी असर बाजार में देखने को मिला है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले दिनों में चुनौतियां कम नहीं है। क्रूड ऑयल देश को परेशान कर सकता है। वहीं रुपए में गिरावट भी देखने को मिल सकती है।

आखिर कब तक विदेशी संकेतों के भरोसे बाजार
अब सवाल ये है कि देश का बाजार आखिर कब तक विदेशी संकेतों और और विदेशी के भरोसे पर टिका रहेगा? एजेंल ब्रोकिंग कमोडिटीज एंड रिसर्च के डिप्टी वाइस प्रेसीडेंट अनुज गुप्ता का कहना है कि एफआईएस में तेजी की वजह से बाजार में बढ़त देखने को मिल रही है। जैसे निवेश गिरेगा वैसे ही मार्केट अपने आप करेक्शन मोड में आ जाएगा। वहीं आरबीआई भी कह चुका है कि आने वाली दो तिमाहियों में देश की इकोनॉमी के आंकड़ों में कोई सुधार नहीं आने वाला है। उन्होंने यह भी सरकार की ओर से जो रिफॉर्म किए जा रहे हैं उसका असर भी दो तिमाहियों के बाद ही देखने को मिलेगा। ऐसे में बाजार को डोमेस्टिक सपोर्ट दो तिमाहियों के बाद ही देखने को मिल सकेगा।

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